For Achieving Goal :

दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं होता है किन्तु क्या सब कुछ हम ही कर लेंगे ?

किसी व्यक्ति ने अनेक छेत्रो में सफलता पाई हो ऐसा शायद ही सुना होगा।
वास्तव में हम किसी एक ही विषय/छेत्र को चुने तो ज्यादा से ज्यादा उस विषय की जानकारी रख सकते है, और अपने सफल होने की सम्भावना बढ़ा सकते है।
अपनी छमता को ध्यान में रखकर अपने लिए लक्ष्य निर्धारित करे और अपने फैसले पर पूरा भरोसा करे। अपने लक्ष्य का कोई नाम,आकार ज़रूर तय करे।
स्वयं को सफलता दिलाने का संकल्प ले और प्रयास करे पूरे मन से।
यदि लक्ष्य के प्रति अपनी छमता पर शंका रखे तो हम अपने संकल्प से डगमगाने लगेंगे ।

निम्न को प्रतिदिन दोहराए- 

१. अपनी सफलता के प्रति पूरी तरह से आश्वस्त हूँ।
२. मुझे अपनी योग्यता/ छमता को निरंतर बढ़ाते रहना है।
३. मौका कभी भी मिल सकता है इसलिए मुझे हमेशा तैयार रहना है।
४. ईश्वर कभी मेरे साथ गलत नहीं देगा ।
५. गलत रास्तो से चलकर सफल नहीं हो सकते बल्कि सफलता की सम्भावना ही ख़त्म हो सकती है।
६. जब तक जीवन है सफल होने की सम्भावना बनी रहेगी। मुझे अंतिम सांस तक अपना प्रयास जारी रखना है।
७. सफलता,जीवन में आये कष्टों को एक पल में मिटा देगा, इसलिए कष्टों की परवाह किये बिना अपना श्रेष्टतम करने का प्रयास करूंगा।
८. जीवन यापन के लिए कोई भी अन्य कार्य करना पड़े किन्तु अपने लक्ष्य को सदैव ध्यान में रखूँगा।
९. मुझे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।




अलीबाबा के संस्थापक जैक मा की कहानी से सफलता की सीख


Click here

अलीबाबा के संस्थापक जैक मा का नाम दुनिया के टॉप एंटरप्रेन्योर्स में शुमार किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि आज 14 ख़रब (22.6 बिलियन डॉलर) से ज्यादा प्रॉपर्टी के मालिक जैक, कभी कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम में तीन बार फेल हो गए थे। इतना ही नहीं चीन के इस सबसे अमीर आदमी को अयोग्य बताकर कई नौकरियों से भी रिजेक्ट कर दिया गया था। चार्ली रोज को दिए एक हालिया इंटरव्यू में इस शख्स ने अपने शुरुआती संघर्ष की कई बातें शेयर की।

इंटरव्यू के दौरान चीन के इस सबसे अमीर आदमी ने बताया कि जब वे कॉलेज से बाहर निकले तो उन्होंने 30 कंपनियों में अलग-अलग जॉब के लिए अप्लाई किया था। लेकिन बहुत प्रयास के बावजूद उन्हें सभी जॉब्स से रिजेक्ट कर दिया गया। जिन कंपनियों ने जैक को रिजेक्ट किया, उनमें दुनिया की नामी फ़ूड चेन 'केएफसी' भी शामिल थी। जैक ने बताया कि 'मैं पुलिस की जॉब के लिए भी गया था, वहां मुझे कहा गया कि मैं इस योग्य नहीं हूं। जब मेरे शहर में केएफसी आई तो मैंने वहां भी जॉब के लिए प्रयास किया। हालांकि यहां भी मुझे छोड़कर जॉब के लिए अप्लाई करने वाले अन्य 23 कैंडिडेट को सिलेक्ट कर लिया गया।

जैक की कहानी से यह मिलती है सीख:

शुरुआती असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए। जैक मा की कहानी से हमें यही सीख मिलती है। नौकरियों से रिजेक्ट होने के बाद भी मा का संघर्ष जारी रहा। उन्होंने 1998 में अलीबाबा की स्थापना की। यह एक इंटरनेट बेस्ड बिजनेस साइट है। जो कस्टमर्स और सेलर्स के लिए काम करती है। अलीबाबा की स्थापना के पहले तीन सालों के दौरान भी मा को कोई ज्यादा फ़ायदा नहीं हुआ। जैक बताते हैं कि हमारे पास पेमेंट का कोई ठोस जरिया नहीं था और कोई भी बैंक हमारे साथ काम करने को तैयार नहीं थी। लेकिन हमने हार नहीं मानी और इसी स्थिति में हमने अपने पेमेंट प्रोग्राम 'अली पे' को शुरू किया। इसकी मदद से दुनिया की अलग-अलग करेंसीज को खरीदारों और विक्रेताओं को ट्रांसफर करना आसान हो गया। शुरुआत में कुछ लोगों ने 'अली पे' को वाहियात आइडिया करार दिया था लेकिन आज इसे दुनियाभर में 80 करोड़ लोग यूज करते हैं।

मनुष्य की कीमत:-

लोहे की दुकान में अपने पिता के साथ काम कर रहे एक बालक ने अचानक ही अपने पिता से पुछा – “पिताजी इस दुनिया में मनुष्य की क्या कीमत होती है ?”
पिताजी एक छोटे से बच्चे से ऐसा गंभीर सवाल सुन कर हैरान रह गये |
फिर वे बोले “बेटे एक मनुष्य की कीमत आंकना बहुत मुश्किल है, वो तो अनमोल है |”
बालक – क्या सभी उतना ही कीमती और महत्त्वपूर्ण हैं ?
पिताजी – हाँ बेटे |
बालक कुछ समझा नही उसने फिर सवाल किया – तो फिर इस दुनिया मे कोई गरीब तो कोई अमीर क्यो है? किसी की कम रिस्पेक्ट तो कीसी की ज्यादा क्यो होती है?
सवाल सुनकर पिताजी कुछ देर तक शांत रहे और फिर बालक से स्टोर रूम में पड़ा एक लोहे का रॉड लाने को कहा.
रॉड लाते ही पिताजी ने पुछा – इसकी क्या कीमत होगी?
बालक – 200 रूपये |
पिताजी – अगर मै इसके बहुत से छोटे-छटे कील बना दू तो इसकी क्या कीमत हो जायेगी ?
बालक कुछ देर सोच कर बोला – तब तो ये और महंगा बिकेगा लगभग 1000 रूपये का |
पिताजी – अगर मै इस लोहे से घड़ी के बहुत सारे स्प्रिंग बना दूँ तो?
बालक कुछ देर गणना करता रहा और फिर एकदम से उत्साहित होकर बोला ” तब तो इसकी कीमत बहुत ज्यादा हो जायेगी |”
फिर पिताजी उसे समझाते हुए बोले – “ठीक इसी तरह मनुष्य की कीमत इसमे नही है की अभी वो क्या है, बल्की इसमे है कि वो अपने आप को क्या बना सकता है |”
बालक अपने पिता की बात समझ चुका था |
बहनों और भाइयों, हमारी कीमत किसी भौतिक पदार्थ के आधार पर निर्धारित नहीं होती, अपितु हमारे अन्दर सर्व प्रकार की परिस्थितियों का सामना करने का सामर्थ्य कितना है और हम हर परिस्थिति में स्वयं को किस प्रकार से अनुकूलित कर पाते हैं |
क्योंकि परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को मोल्ड नहीं कर पाने की वजह से ही आज मनुष्य अनेक मानसिक बीमारियों से ग्रसित है | हमारी जीवन मे कई बार स्थितियाँ अच्छी नही होती है पर इससे हमारी मूल्य कम नही हो जाता |
स्वयं परमात्मा द्वारा उच्चारित वाक्य है कि 'स्वयं को हर परिस्थिति में मोल्ड करने वाला ही 'Real Gold' है |'


अपनी उन्नति का रहस्य

दोस्तों आज का विषय है - अपनी उन्नति का रहस्य ।
हम सभी ने अपने आसपास देखा ही होगा कि हमारे पास कुछ ऐसे लोग है जो हमेशा खुश रहते है और कुछ ऐसे भी है जो हमेशा दुःख की ही बाते ही करते है| कभी गलती से उनका हाल चाल पूछ लिया तो बस चालू हो जाते है - बहुत बुरा हाल है, सब मौज ले रहे है, बस ऊपर वाला हमारी ही नहीं सुनता । किस्मत ही ख़राब है अपनी तो ।
आज इन्ही लोगो की बाते है करते है आपसे । इनके साथ बैठना किसी को अच्छा नहीं लगता क्योकि इनसे सामने वाले को कुछ learning नहीं मिलती । इनका लोग धीरे धीरे मजाक उड़ाना चालू कर देते है । ये बाते ये भी जानने लगते है और फिर परेशानिया दिन पे दिन और बढ़ने लगती है । वो जब खली बैठते है , टीवी देखते है बस कामयाब होने की सोचते रहते है । लेकिन दोस्तों इनकी सोच सही दिशा में नहीं होती । जब टीवी पर बाबा लोगो की ऐड आती हे - लक्की लॉकेट्स, सिद्ध यन्त्र और हाँ चमत्कारी स्टोन | इनको देख कर तो इनकी मानो जैसे लाटरी ही निकल जाती है । आपने काफी दोस्तों को ये साड़ी चीजे उसे करते हुए देखा होग।
मै किसी को गलत नहीं बता रहा मगर मेरा ऐसा मानना है कि ये सही डायरेक्शन नहीं है । आप बताइये दोस्तों आपको प्यास लगी है और आपके सामने स्टील का गिलास न होकर सोने का गिलास भी क्यों ना रख दिया जाय , आपकी प्यास केवल पानी पीने से ही मिटेगी न की गिलास को बदल देने पर । यानि सिर्फ यन्त्र, ताबीज़ और उपाय करने से आप सफलता को हासिल नहीं कर सकते ।
कुछ लोग ज्योतिष आचार्यो के पास जाते है । वो उनको बाते है कि आपके ऊपर फलाना गृह है जिसके कुप्रभाव की वजह से आपके काम नहीं बन रहे | ये उपाय करवा लो सब ठीक हो जाएगा | क्या वो ठीक हो जायेंगे । नहीं दोस्तों क्यूंकि जबाव् बिलकुल साफ़ है की आदि आपको बुखार है तो केवल बुखार की ही दवाई आपको ठीक कर पाएगी और किसी बीमारी की नहीं ।
दोस्तों अपने अनुभव के आधार पर जो निम्न उपाय है जिनके द्वारा ये लोग और जो भी सफल होना चाहता है कामयाबी को पा सकेंगे :
१. अपने क्षेत्र में चाहे वो स्टडी हो या जॉब , अच्छी पकड़ होनी चाहिए । जैसे यदि कोई क्वालिटी इंजीनियर है तो उसे अपनी जॉब प्रोफाइल (सभी क़्वालिटी टूल्स) की अच्छी नॉलेज होनी चाहिए ।
२. उसे अपने विचारो को हमेशा सकारात्मक बनाये रखने के लिए मोटिवेशनल बुक्स और अच्छे लोगो के साथ रहना चाहिए ।
३. दोस्तों जिंदगी के हर दौर में रुकावटे आती ही है , मगर हम को उन्हें पार करना चाहिए । विजेता वही होता है जो अंतिम समय तक रेस में शामिल रहता है ।
ये तो कुछ बाते है जिनके द्वारा मैं सिर्फ और सिर्फ आपको ये शेयर करना चाहता हु कि आप भी और लोगो की तरह ही हो जो खुश रहते है, जो सफल है । उनमे शामिल होइए और अपनी लाइन में कौशिश करते रहिये । यही उन्नति का रहस्य है -
भाग लो या भाग लो ।
Participate or Run away .


बहाने Vs सफलता

1- मुझे उचित शिक्षा लेने का अवसर नही मिला...
उचित शिक्षा का अवसर फोर्ड मोटर्स के मालिक हेनरी फोर्ड को भी नही मिला ।
2- बचपन मे ही मेरे पिता का देहाँत हो गया था...
प्रख्यात संगीतकार ए . आर . रहमान के पिता का भी देहांत बचपन मे हो गया था।
3- मै अत्यंत गरीब घर से हूँ ...
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी गरीब घर से थे ।
4- बचपन से ही अस्वस्थ था...
आँस्कर विजेता अभिनेत्री मरली मेटलिन भी बचपन से बहरी व अस्वस्थ थी ।
5 - मैने साइकिल पर घूमकर आधी ज़िंदगी गुजारी है...
निरमा के करसन भाई पटेल ने भी साइकिल पर निरमा बेचकर आधी ज़िंदगी गुजारी ।
6- एक दुर्घटना मे अपाहिज होने के बाद मेरी हिम्मत चली गयी...
प्रख्यात नृत्यांगना सुधा चन्द्रन के पैर नकली है ।
7- मुझे बचपन से मंद बुद्धि कहा जाता है...
थामस अल्वा एडीसन को भी बचपन से मंदबुद्धि कहा जाता था।
8- मै इतनी बार हार चूका , अब हिम्मत नही...
अब्राहम लिंकन 15 बार चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने।
9- मुझे बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी...
लता मंगेशकर को भी बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी थी।
10- मेरी लंबाई बहुत कम है...
सचिन तेंदुलकर की भी लंबाई कम है।
11- मै एक छोटी सी नौकरी करता हूँ , इससे क्या होगा...
धीरु अंबानी भी छोटी नौकरी करते थे।
12- मेरी कम्पनी एक बार दिवालिया हो चुकी है , अब मुझ पर कौन भरोसा करेगा...
दुनिया की सबसे बङी शीतल पेय निर्माता पेप्सी कोला भी दो बार दिवालिया हो चुकी है ।
13- मेरा दो बार नर्वस ब्रेकडाउन हो चुका है , अब क्या कर पाउँगा...
डिज्नीलैंड बनाने के पहले वाल्ट डिज्नी का तीन बार नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था।
14- मेरी उम्र बहुत ज्यादा है...
विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड चिकेन के मालिक ने 60 साल की उम्र मे पहला रेस्तरा खोला था।
15- मेरे पास बहुमूल्य आइडिया है पर लोग अस्वीकार कर देते है...
जेराँक्स फोटो कापी मशीन के आईडिया को भी ढेरो कंपनियो ने अस्वीकार किया था पर आज परिणाम सामने है ।
16- मेरे पास धन नही...
इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पङे।
17- मुझे ढेरो बीमारियां है...
वर्जिन एयरलाइंस के प्रमुख भी अनेको बीमारियो मे थे | राष्ट्रपति रुजवेल्ट के दोनो पैर काम नही करते थे।
कुछ लोग कहेगे कि यह जरुरी नही कि जो प्रतिभा इन महानायको मे थी , वह हम मे भी हो ...
सहमत हूँ मै , लेकिन यह भी जरुरी नही कि जो प्रतिभा आपके अंदर है वह इन महानायको मे भी हो.

सार यह है कि...
आज आप जहाँ भी है या कल जहाँ भी होगे इसके लिए आप किसी और को जिम्मेदार नही ठहरा सकते ,
इसलिए आज चुनाव करिये - सफलता और सपने चाहिए या खोखले बहाने ...?

Yes, I am lucky!!

दोस्तों जीवन में कई बार लोग जो काम करना चाहते हैं, अगर वो नहीं हो पाता तो अमूमन आपने लोगो से ये शब्द कहते सुना होगा।
“मेरा तो भाग्य ही ख़राब हैं”
“भाग्य में ही रोना लिखा हैं भाई!”
ऐसे ही कुछ और वाक्य होंगे, जो अक्सर सुनने में आते हैं। हम परिस्थितियों को कोसने और दुःख मनाने में इतने तल्लीन हो जाते हैं कि उस पल मिली अच्छी यादों और खुशियों के बारे में सोचना भी भूल जाते हैं।
नीचे मैं एक कहानी सुनाने जा रहा हूँ, उसके बाद आपका दुर्घटनाओ के प्रति थोडा नजरिया बदलेगा और आप भाग्य को कोसना छोड़ देंगे।
रवि को Monday को morning में एक week के लिए tour पर जाना था। उसने अपनी सारी तैयारियां (Tickets/ Bag/ जरुरी documents) पहले से ही कर रखीं थी, ताकि आखिरी समय पर भागदौड़ से बचा जा सके। इसलिए उसने रविवार रात को ही अगले दिन सुबह airport जाने के लिए अपने शहर में उपलब्ध taxi सेवा से सोमवार सुबह सात बजे की taxi book करवाई और सुबह जल्दी उठ कर टैक्सी की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली।
अब देखो उसको भाग्य कैसे उसका साथ देता हैं frown emoticonऔर कहानी में कैसे twist आता हैं।
सुबह सात बजे ही taxi के call center से फ़ोन आता हैं कि वे taxi उपलब्ध नहीं करवा सकते और अब शुरू हो गई भागा-दौड़ी। क्योकि airport पर तो reporting समय पर पहुंचना जरुरी था, नहीं तो flight छुटने का डर था। खैर घर से two wheeler निकाल कर उस पर सूटकेस और लैपटॉप bag लाद कर और पीछे धर्मपत्नी को बैठा, भागा auto-rickshaw stand की ओर, और auto पकड़ कर airport की और रवाना हुआ। पर ज़नाब अभी यह उधेड़बुन खत्म कहाँ हुई। airport से कुछ दूर पहले traffic जाम था। Auto छोड़ रवि ने सामान लाद कर पैदल ही दौड़ लगाई और आखिरकार flight पकड़ ही ली।
यहाँ भी कहानी ख़त्म नहीं हुई smile emoticon flight अपने निश्चित समय पर Jaipur पहुच गई और। वहां से रवि को Agra तक train से जाना था। अत: Jaipur airport से रेलवे स्टेशन के लिए taxi कर ली, जो की बेहद आराम से निश्चित समय पर रेलवे स्टेशन पर पहुच ही जाती, परन्तु बीच में शायद किसी मंत्री का काफिला आ गया। और चारो और से traffic रोक दिया गया। Train छुटने का भय और रास्ते में पड़ते traffic signals ने रवि की दिल की धडकनों को बढ़ा दिया, क्योकि train छुटने का सीधा-सीधा मतलब था कि पुरे week की planning का बिगड़ना।
खैर, सारी मुसीबतों से लड़ते-भिड़ते train मिल गई, क्योकि वह दस मिनट की देरी से चल रही थी ट्रेन में सामान रखते हुए माथे का पसीना पोछतें हुए और लम्बी-लम्बी सी सांस खीच कर रवि ने कहा - thanks God !! I am lucky!
चौंक गए न। क्यों कि रवि को तो इस समय कहना चाहिए था कि मेरा को भाग्य ही ख़राब हैं परन्तु रवि का उन घटनायो को देखने का नजरिया सकारात्मक था, क्योकि इतनी विषम परिस्थतियो के होते हुए भी यदि आप सफलता प्राप्त कर लेते हैं, तो आपका भाग्य ख़राब नहीं हैं आप तो बेहद भाग्यवान हैं। विपरीत परिस्थतियों से लड़ते हुए लगातार आगे बढ़ते रहने वाला खुद को भाग्यवान मानता हैं। और थक कर बैठ जाने वाला खुद को दुर्भाग्यशाली।
आपके जीवन में आई कोई भी छोटी-छोटी चुनौती ईश्वर द्वारा की गई केवल परीक्षा मात्र हैं, जिसमे सफलता प्राप्त करने वाला कहलाता हैं भाग्यवान।
अपने भविष्य और भाग्य के निर्माता स्वयं आप हैं अत: नकारात्मक सोच को स्वयं से दूर रखकर हर विपरीत परिस्थिति में भी कुछ न कुछ सकारात्मक खोजें और कहें “मैं भाग्यवान हूँ”।
Yes, I am lucky!!





आत्म-मूल्यांकन से मिलती हैं सफलता :

दोस्तों, जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्म-मूल्यांकन बहुत जरुरी हैं।
सफलता चुटकियो में नहीं मिलती और न ही परंपरागत रूप से एक ही तरह का काम करने से।
योजना बनाकर उस पर अमल करना भी मायने रखता हैं।
कोई भी काम ख़राब या छोटा नहीं होता और सभी तरह के काम में समान तरह के अवसर मौजूद होते हैं।लेकिन कोई उस काम में काफी पैसा बना लेता हैं और कोई उससे पैसा कमाने के बजाय सब कुछ गवां देता हैं।क्या कभी आपने सोचा हैं ऐसा क्यों होता हैं? ये तो आप सब ने सुना होगा दोस्तों से “अरे यार इस काम में ज्यादा पैसा नहीं हैं और मेहनत भी ज्यादा हैं, जबकि उसी काम में कोई अच्छा पैसा बना रहा हैं इसका मतलब यह हैं कि काम तो वह ख़राब नहीं हैं।”
तो फिर क्यों इतना फर्क हैं, कुछ लोग बोलते हैं अरे यार “वो किस्मत वाला हैं या फिर उसकी किस्मत अच्छी हैं अपने तो भाग्य में तो रोना ही लिखा हैं।”
दोस्तों, ऐसा कुछ भी नहीं हैं आप अपना आत्म-मूल्यांकन कीजिये शायद जबाब आपको खुद-ब-खुद मिल जाए अब आपका सवाल कैसे करू मूल्यांकन? मैं help करता हूँ।
खुद से ये सवाल कीजिये और जबाब पूछिए।

स्वयं की योग्यता की पहचान :

जो स्वयं से परिचित नहीं है उसे दूसरो के दिए पहचान से ही काम चलाना पड़ता है|जब आपको अपना नाम ही नहीं मालूम होगा तो आप किसी भी नाम के पुकारे जाने पर उसे अपना नाम समझ सकते है|
तब सोचे कि प्रत्येक आपको अपनी पसंद का नाम दे रहा होगा |
आपकी असली पहचान का फिर क्या होगा ?
ज्यादातर हम इसी कमजोरी के शिकार है |

स्वयं की योग्यता को नहीं पहचान पाने वाले, उस फुटबाल  की तरह कहे जा  सकते है जिसका अपना कोई लक्ष्य नहीं होता है |जिसके भी पैरो पर  जाये वही उसे अपने मकसद के लिए उपयोग करता रहता है |
यदि सचमुच आप स्वयं को अक्लमंद समझते है तो किसी भी तरह के पूर्वाग्रह का शिकार  होते हुए
अपनी वास्तविक योग्यता को पहचानिए और स्वीकार कीजिये |

यह पहचान आपको अपने अन्दर स्वयं से तलाश करनी होगी | ज्यादातर लोग अपनी वास्तविक योग्यता को स्वीकार करने से घबराते है/बचते है और यही पर भूल कर जाते है क्योकि आपकी वास्तविक योग्यता ही आपको सफल होने में मदद कर सकती है |जैसे यदि आपने गणित विषय से पढाई की है तो आप किसी हॉस्पिटल में चिकित्सक हो जाने के विषय में नहीं सोच सकते |यदि आप पैरो से चलने में अक्षम है तो आप दौड़ नहीं जीत सकते यह स्वीकार करना ही होगा |

कल्पना आप कर सकते है किन्तु जीवन कल्पनाओ से परे है |एक  एक दिन आपको सच का सामना करना ही पड़ता है |फिर क्यों हम स्वयं को धोखे में रखते है?क्यों हमें  लगता है कि हम यह भी कर सकते है,
हम वह भी कर सकते है और अंत में पता चलता है कि हम कुछ भी सही ढंग से नहीं कर पाए और असफल घोषित हो गए,फिर क्या करते है ?

जो भी जैसा भी जीवनयापन लायक काम ढूढ़ लेते है और सारी जिंदगी अपनी नाकामी का रोना रोते है |बात-बात पर शिकायत करते है ?
स्वयं से तो कुछ कर नहीं पाए तो औरो को भी नहीं करने के लिए समझाते है, उन्हें अपनी नाकामी का हवाला देकर दुष्प्रेरित करते है|

सब कुछ जानते हुए भी हम स्वयं पर भरोसा नहीं कर पाते है 
और अपनी असली योग्यता को भूलकर दूसरो की योग्यता को अपनाने के लिए दौड़ पड़ते है
और बस यही पर चूक हो जाती है |
दूसरे की योग्यता  को सही तरीके से अपना नहीं पाने के कारण नुकसान तो होता ही है
साथ ही हम अपनी योग्यता से जो पा सकते थे वह भी हाथ से जाते रहता है 



 

आभासी दुनिया से बाहर निकलना

ईमेल, फेसबुक, ट्विटर, चैट, मोबाइल और शेयरिंग की दुनिया में यह बहुत संभव है कि आप वास्तविक दुनिया से दूर होते जाएँ. ये चीज़ें बुरी नहीं हैं लेकिन ये वास्तविक दुनिया में आमने-सामने घटित होनेवाले संपर्क का स्थान नहीं ले सकतीं. लोगों से मेलमिलाप रखने, उनके सुख-दुःख में शरीक होने से ज्यादा कनेक्टिंग और कुछ नहीं है. आप चाहे जिस विधि से लोगों से जुड़ना चाहें, आपका लक्ष्य होना चाहिए कि आप लम्बे समय के लिए जुड़ें. दोस्तों की संख्या नहीं बल्कि उनके साथ की कीमत होती है.

बोनस टिप:

हम कई अवसरों पर खुद को पीछे कर देते हैं क्योंकि हमें कुछ पता नहीं होता या हम यह नहीं जानते कि शुरुआत कहाँ से करें. ऐसे में “मैं नहीं जानता” कहने के बजाय “मैं यह जानकर रहूँगा” कहने की आदत डालें. यह टिप दिखने में आसान है पर बड़े करिश्मे कर सकती है. इसे अपनाकर आप बिजनेस में आगे रहने के लिए ज़रूरी आक्रामकता दिखा सकते हैं. आप योजनाबद्ध तरीके से अपनी किताबें छपवा सकते हैं. और यदि आप ठान ही लें तो पूरी दुनिया घूमने के लिए भी निकल सकते हैं. संकल्प लें कि आप जानकारी नहीं होने को अपनी प्रगति की राह का रोड़ा नहीं बनने देंगे.

अपने हुनर और काबिलियत को निखारें:

पेन और पेपर लें. पेपर के बीच एक लाइन खींचकर दो कॉलम बनायें. पहले कॉलम में अपने पिछले तीस दिनों के सारे गैरज़रूरी खर्चे लिखें जैसे अनावश्यक कपड़ों, शौपिंग, जंक फ़ूड, सिनेमा, मौज-मजे में खर्च की गयी रकम. हर महीने चुकाए जाने वाले ज़रूरी बिलों की रकम इसमें शामिल न करें. अब दूसरे कॉलम में उन चीज़ों के बारे में लिखें जिन्हें आप पैसे की कमी के कारण कर नहीं पा रहे हैं. शायद आप किसी वर्कशौप या कोचिंग में जाना चाहते हों या आपको एक्सरसाइज बाइक खरीदनी हो. आप पहले कॉलम में किये गए खर्चों में कटौती करके दुसरे कॉलम में शामिल चीज़ों के लिए जगह बना सकते हैं.