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किसी जंगल में एक बहुत बड़ा तालाब था . तालाब के पास एक बागीचा था , जिसमे अनेक प्रकार के पेड़ पौधे लगे थे . दूर- दूर से लोग वहाँ आते और बागीचे की तारीफ करते |

गुलाब के पेड़ पे लगा पत्ता हर रोज लोगों को आते-जाते और फूलों की तारीफ करते देखता, उसे लगता की हो सकता है एक दिन कोई उसकी भी तारीफ करे. पर जब काफी दिन बीत जाने के बाद भी किसी ने उसकी तारीफ नहीं की तो वो काफी हीन महसूस करने लगा . उसके अन्दर तरह-तरह के विचार आने लगे—” सभी लोग गुलाब और अन्य फूलों की तारीफ करते नहीं थकते पर मुझे कोई देखता तक नहीं , शायद मेरा जीवन किसी काम का नहीं …कहाँ ये खूबसूरत फूल और कहाँ मैं… ” और ऐसे विचार सोच कर वो पत्ता काफी उदास रहने लगा  |
दिन यूँही बीत रहे थे कि एक दिन जंगल में बड़ी जोर-जोर से हवा चलने लगी और देखते-देखते उसने आंधी का रूप ले लिया. बागीचे के पेड़-पौधे तहस-नहस होने लगे , देखते-देखते सभी फूल ज़मीन पर गिर कर निढाल हो गए , पत्ता भी अपनी शाखा से अलग हो गया और उड़ते-उड़ते तालाब में जा गिरा |


पत्ते ने देखा कि उससे कुछ ही दूर पर कहीं से एक चींटी हवा के झोंको की वजह से तालाब में आ गिरी थी और अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी |


चींटी प्रयास करते-करते काफी थक चुकी थी और उसे अपनी मृत्यु तय लग रही थी कि तभी पत्ते ने उसे आवाज़ दी, ” घबराओ नहीं, आओ , मैं तुम्हारी मदद कर देता हूँ .”, और ऐसा कहते हुए अपनी उपर बैठा लिया. आंधी रुकते-रुकते पत्ता तालाब के एक छोर पर पहुँच गया; चींटी किनारे पर पहुँच कर बहुत खुश हो गयी और बोली, ” आपने आज मेरी जान बचा कर बहुत बड़ा उपकार किया है , सचमुच आप महान हैं, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ! “


यह सुनकर पत्ता भावुक हो गया और बोला,” धन्यवाद तो मुझे करना चाहिए, क्योंकि तुम्हारी वजह से आज पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ , जिससे मैं आज तक अनजान था. आज पहली बार मैंने अपने जीवन के मकसद और अपनी ताकत को पहचान पाया हूँ … .’
मित्रों , ईश्वर ने हम सभी को अनोखी शक्तियां दी हैं ; कई बार हम खुद अपनी काबिलियत से अनजान होते हैं और समय आने पर हमें इसका पता चलता है, हमें इस बात को समझना चाहिए कि किसी एक काम में असफल होने का मतलब हमेशा के लिए अयोग्य होना नही है . खुद की काबिलियत को पहचान कर आप वह काम कर सकते हैं , जो आज तक किसी ने नही किया है | 

Keep in Touch with your Network

"मनुष्य को बोलना सिखने में दो साल लगते है । किन्तु यह समझने में जीवन बीत जाता है कि कब क्या बोलना चाहिए ।"- एक प्राचीन भारतीय कहावत 

दोस्तों चाहे मानो या ना मानो किन्तु हम बहुत अधिक बोलते है । कभी कभी हम अपने मित्रो और परिवार के सदस्यों से यु ही बिना किसी ख़ास बात न होने पर भी घंटो बाते करते रहते है । हमारी यह आदत फ़ोन पर भी है । अक्सर आप ने खुद को या आसपास के लोगो को फ़ोन पर बिना किसी बात के बहुत लम्बी -२ बाते करते देखा होगा ।

लेकिन ये बाते अपने कुछ जानकारों से ही करते है । यदि आपके पास काफी समय के बाद किसी परिचित का फ़ोन आ जाता है तो आप्प सबसे पहले यही पूछते हो की" क्या हुआ ,फ़ोन कैसे किया ?" यदि आप किसी को काफी समय के बाद फ़ोन करते हो तो उसकी भी यही प्रतिक्रिया होती है " क्या काम है ? फ़ोन कैसे किया ?"

इसका अर्थ  यह है कि अक्सर हम उन्ही लोगो को फ़ोन करते है जो  हमारे लिए अपना समय बर्बाद करने को तैयार है या जिन्हें हम अपना समय दे  सकते है या उनको करते है जिनसे हमको कोई ख़ास काम होता है ।

लेकिन दोस्तों इससे अलग एक दूसरे प्रकार की कॉल होती है जिसे किट(कीप इन टच ) कॉल कहते है । आपकी डायरेक्टरी ,डायरी या आपके कार्ड इंडेक्स में ऐसे बहुत से नम्बर होंगे जिनको आपने महीनो और कइयों को तो सालो से टच नही किया । आपको इन लोगो से दोबारा संपर्क बनाने की आवश्यकता है ।

चाहे आप इन भूले बिसरे लोगो से बस इतना ही कहे " आप कैसे है ? सब कुछ टेक है न? "  यदि वो आपसे पूछते है "कैसे याद किया" तो आप को कहना चाहिए की बस ऐसे ही आपसे बात करने की इच्छा हो रही थी ।विश्वास मानिए दोस्तों वह व्यक्ति खुश हो जायेगा क्योकि आपने बिना किसी से या किसी काम को कराने के लिए फ़ोन नहीं किया । 

आजकल कॉल्स के साथ साथ , SMS , व्हाट्सप्प(Whatsapp) और कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स है जिसके through हम अपने जानने वालो से टच रह सकते है । तो दोस्तों अपने नेटवर्क को स्ट्रांग करे । आपका आज बिना किसी स्वार्थ के टच रहना समय आने पर आपके बहुत काम आएगा । और दूसरा कई चीजे स्वार्थ से ऊपर होती है । अपने जान पहचान के लोगो से टच रहना कोई बुरी बात नही ।

सोचने का नजरिया

एक महान लेखक अपने लेखन कक्ष में बैठा हुआ लिख रहा था।
**पिछले साल मेरा आपरेशन हुआ और मेरा गाल ब्लाडर निकाल दिया गया। इस आपरेशन के कारण बहुत लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ा।
**इसी साल मैं 60 वर्ष का हुआ और मेरी पसंदीदा नौकरी चली गयी। जब मैंने उस प्रकाशन संस्था को छोड़ा तब 30 साल हो गए थे मिझे उस कम्पनी में काम करते हुए।
**इसी साल मुझे अपने पिता की मृत्यु का दुःख भी झेलना पड़ा।
**और इसी साल मेरा बेटा कार एक्सिडेंट हो जाने के कारण मेडिकल की परिक्षा में फेल हो गया क्योंकि उसे बहुत दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। कार की टूट फुट का नुकसान अलग हुआ।
अंत में लेखक ने लिखा,
**वह बहुत ही बुरा साल था।
जब लेखक की पत्नी लेखन कक्ष में आई तो उसने देखा कि, उसका पति बहुत दुखी लग रहा है और अपने ही विचारों में खोया हुआ है।अपने पति की कुर्सी के पीछे खड़े होकर उसने देखा और पढ़ा कि वो क्या लिख रहा था।
वह चुपचाप कक्ष से बाहर गई और थोड़ी देर बाद एक दुसरे कागज़ के साथ वापस लौटी और वह कागज़ उसने अपने पति के लिखे हुए कागज़ के बगल में रख दिया।
लेखक ने पत्नी के रखे कागज़ पर देखा तो उसे कुछ लिखा हुआ नजर आया, उसने पढ़ा।
**पिछले साल आखिर मुझे उस गाल ब्लाडर से छुटकारा मिल गया जिसके कारण मैं कई सालों से दर्द से परेशान था।
**इसी साल मैं 60 वर्ष का होकर स्वस्थ दुरस्त अपनी प्रकाशन कम्पनी की नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ। अब मैं पूरा ध्यान लगाकर शान्ति के साथ अपने समय का उपयोग और बढ़िया लिखने के लिए कर पाउँगा।
**इसी साल मेरे 95 वर्ष के पिता बगैर किसी पर आश्रित हुए और बिना गंभीर बीमार हुए परमात्मा के पास चले गए।
**इसी साल भगवान् ने एक्सिडेंट में मेरे बेटे की रक्षा की। कार टूट फुट गई लेकिन मेरे बच्चे की जिंदगी बच गई। उसे नई जिंदगी तो मिली ही और हाँथ पाँव भी सही सलामत हैं।
अंत में उसकी पत्नी ने लिखा था,
**इस साल भगवान की हम पर बहुत कृपा रही, साल अच्छा बीता।

तो देखा आपने, सोचने का नजरिया बदलने पर कितना कुछ बदल जाताN है।चीजें वही रहती हैं पर आत्मसंतोष कितना मिलता है । बस हमारे नजरिये का फर्क है कि हम चीजो को किस तरीके से देखते है । हममें से ज्यादातर नेगेटिव सोचते है जैसा की इस कहानी में  पति सोचता है और खुद परेशान होता है और अपने आसपास के माहोल जैसे ऑफिस,घर और दोस्तों को भी परेशान करता है । लेकिन दोस्तों एक हकीकत बताऊ ये जितने भी लोग है जो हम से संपर्क में है ये सिर्फ हम से सिर्फ अच्छे व्यवहार को चाहते है न कि हमारे बुरे वयवहार को। तो दोस्तों खुद खुश रहे, पॉजिटिव रहे और हर चीज़ की पॉजिटिव साइड सोचिये । 

ग़्लास मत बनिए झील बनिए

एक बार एक नवयुवक किसी साधू  महात्मा  के पास पहुंचा ।

“महात्मा जी , मैं अपनी ज़िन्दगी से बहुत परेशान हूँ , कृपया इस परेशानी से निकलने का उपाय बताएं !” , युवक बोला |

महात्मा जी बोले , “ पानी के ग्लास में एक मुट्ठी नमक डालो और उसे पीयो । ”युवक ने ऐसा ही किया ।

“ इसका स्वाद कैसा लगा ?”, महात्मा जी ने पुछा।

“बहुत ही खराब … एकदम खारा .” – युवक थूकते हुए बोला ।

महात्मा जी मुस्कुराते हुए बोले,“एक बार फिर अपने हाथ में एक मुट्ठी नमक लेलो और मेरे पीछे -पीछे आओ।

दोनों धीरे -धीरे आगे बढ़ने लगे और थोड़ी दूर जाकर स्वच्छ पानी से बनी एक झील के सामने रुक गए ।

“चलो , अब इस नमक को पानी में दाल दो .” , महात्मा जी ने निर्देश दिया।युवक ने ऐसा ही किया ।

“ अब इस झील का पानी पियो .” , महात्मा जी बोले ।

युवक पानी पीने लगा …,

एक बार फिर महात्मा जी ने पूछा ,: “ बताओ इसका स्वाद कैसा है , क्या अभी भी तुम्हे ये खरा लग रहा है ?”

“नहीं , ये तो मीठा है , बहुत अच्छा है ”, युवक बोला ।

महात्मा जी युवक के बगल में बैठ गए और उसका हाथ थामते हुए बोले , “ जीवन के दुःख बिलकुल नमक की तरह हैं ; न इससे कम ना ज्यादा ।  जीवन में दुःख की मात्रा  वही रहती है , बिलकुल वही । लेकिन हम कितने दुःख का स्वाद लेते हैं ये इस पर निर्भर करता है कि हम उसे किस पात्र में डाल रहे हैं ।  इसलिए जब तुम दुखी हो तो सिर्फ इतना कर सकते हो कि खुद को बड़ा कर लो …ग़्लास मत बने रहो झील बन जाओ । ”

विशेष निवेदन :- दोस्तो कहानी कैसी लगी हमें जरूर बताये ।

* Post को शेयर करना ना भूले इससे ज्ञान का विस्तार होगा (Facebook,Twitter and through gmail)


धन्यवाद...,

SWOT ANALYSIS


दोस्तों,  आज मैं आपके साथ एक ऐसी आत्मविश्लेषण करने की तकनीक  swot analysis technique साझा करने जा रहा हुं , जिसके जरिये हम खुद का एक विश्लेषणात्मक मुल्यांकन कर सकते है । 

आइए जानते है क्या है यह तकनीक?  

इस तकनीक का नाम है SWOT Analysis. इसकी सहायता से हम अपनी खुबियों,  कमजोरियों,  अवसरों और चुनौतियों के बारे में जान सकते है । इसमें हमें अपने आप से कुछ सवाल पुछकर उनके उत्तर देना है । सामान्य तौर पर यह पाया गया है कि जितनी आसानी से हम दुसरों की कमियों और खुबियों का मुल्यांकन कर सकते उतनी आसानी से स्वयं का मुल्यांकन नहीं कर पाते है । परन्तु ये बात भी सच है कि जितनी सटीकता और वास्तविकता से हम अपना मुल्यांकन कर सकते है ऐसा ओर कोई दुसरा व्यक्ति नहीं कर सकता है । हमारी खुबियां  और कमियां हम से बेहतर और कौन जान सकता है ? 

तकनीक का इस्तेमाल कैसे करें ? 

सबसे पहले एक पेन और कागज साथ में लें और किसी एकान्त और शांत जगह पर चले जाएं । यह शांत जगह आपका कमरा,  छत,  कुछ भी हो सकती है । अब कागज को चार बराबर हिस्सों में बांट लें और उसके चार भागों में अंग्रजी के अक्षर S (Strengths) , W (Weaknesses) , O  (Opportunities) और T  (Threats)  लिखें । इसमें से पहले और तीसरे हिस्से वाली चीजें आपके लिए Helpful यानि कि उपयोगी है तथा दुसरे और चौथे हिस्से वाली चीजें Harmful है यानि कि नुकसानदायी ।

अब एक एक करके नीचे दिए गए इन प्रश्नों के उत्तर संबंधित भाग में लिखते जाएं । याद रखें इन सवालों के उत्तर आपको पुरी निष्पक्षता और ईमानदारी से देने है । जवाब लिखने में किसी तरह की जल्दबाजी न करें ।

















अब लिखे गए आपके इन जवाबों को दो - तीन बार तसल्ली से पढें । S हिस्से में जितने जवाब है वह सब आपके लक्ष्य को हासिल करने में आपके सहायक तत्व है । W वाले हिस्से में लिखे हुए जवाब आपकी सफलता और अच्छे काम में  बाधक तत्व हैं । अब ये आपके ऊपर है कि आप अपनी इन कमजोरियों से कैसे निपटते है ?  O हिस्से में लिखे हुए जवाब आपके लिए सफलता के द्वार है । ये द्वार कभी- कभी ही खुलते है । इसलिए आपके सामने लिखे हुए  O हिस्से के जवाबों को अच्छे से पढें । और  इनका फायदा उठायें । अब T हिस्से के जवाबों को पढें । ये सभी आपकी सफलता की राह के कांटें हैं जिनसे आपको बचना है ।

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती


लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
- हरिवंशराय बच्चन (Harivansh Rai Bachchan)
Source : Internet

आओ अपनी-अपनी क़िस्मत बदलते हैं...



आओ अपनी-अपनी क़िस्मत बदलते हैं..
अपना गुज़रा हुआ कल अभी ज़्यादा पीछे नहीं गया है
फिर उसी सिफ़र से शुरू करते हैं
नाम-रंग-जाति-धर्म हर कुछ
जिन-जिन का वास्ता है क़िस्मत के साथ
उन सबको बदलते हैं
आओ अपनी-अपनी क़िस्मत बदलते हैं...

 मैं कुछ भी नहीं सोचूंगा... तुम सोचना
मैं कुछ भी नहीं बोलूंगा.... तुम बोलना
मैं किसी से नहीं लडूंगा... तुम लड़ना
मैं कुछ नहीं चाहूंगा... तुम चाहना
तुम सपने देखना... तुम ही उन्हें पूरा करना
हां तुम्हारी शर्तों पर ही ये खेल खेलते हैं
आओ अपनी-अपनी क़िस्मत बदलते हैं...

 तुम मेरी ज़िन्दगी बस एक बार जी लो
मैं तुम्हारी हर ज़िन्दगी बग़ैर शिक़ायत किए जी लूंगा
चलो तुम्हारी मनचाही मुराद पूरी करते हैं
आओ अपनी-अपनी क़िस्मत बदलते हैं...

चलो एक और वादा करता हूं
मैं नहीं चिढ़ाउंगा तुम्हें हर हार पर
जैसे तुम और बाक़ी लोग चिढ़ाया करते थे
मैं नहीं जलील होने दूंगा तुम्हें सबके सामने
और हां आईने में शक़्ल देखने से भी नहीं रोकूंगा

क़बूल कर लो कि अब ये मेरी भी ख़्वाहिश है
आओ एक-दूसरे की ज़िन्दगी जीते हैं
आओ अपनी-अपनी क़िस्मत बदलते हैं...

Source : Internet

जो डर गया समझो वो मर गया



Life मे यदि हम किसी चीज या काम को करने मे असफल होते है तो उसकी वजह केवल एक छोटा सा शब्द डर (FEAR) है | यह शब्द डर दिखने मे तो बहुत छोटा है लेकिन जिसके मन मे यह डर बैठ गया समझो वह इंसान मर गया |

दोस्तो डर (Fear) एक ऐसी चीज है जो लगभग सभी के मन मे होता है | हर किसी मे अलग अलग प्रकार का डर होता है, जैसे किसी को परिक्षा मे फेल होने का डर, तो किसी को नौकरी चली जाने का डर होता है| यह डर (Fear) आम आदमी को अंदर से हिला कर रख देता है| एक असफलता (Failure) के भय से एक साधारण आदमी हमेशा साधारण ही बना रहता है, क्योंकि वह डरता है कि कही वह असफल (Fail)  ना हो जाये | केवल डर कि वजह से आदमी कुछ नया नही कर पाता और ना ही अपनी क्षमताओ (Capabilities) को पहचान पाता है, लेकिन जो इंसान एक बार इस डर के जंजाल से निकल जाता है, तो फिर पुरी दुनिया उसके कदमो तले होती है |

क्या आपने कभी सोचा है इंसान के मन मे डर आता क्यों है?

डर का एकमात्र कारण केवल आदमी के अंदर छिपी हुई अज्ञानता है | जब हम कुछ नया करना चाहते है और अगर हमे उस काम या चीज से सम्बंधित परिस्थितियो के बारे मे जानकारी नही है तो हम डॅरने लग जाते है कि कही कुछ गलत ना हो जाये | इस स्थिति मे हम उस काम को करने की बजाय उससे दूर भागने लग जाते है| जिससे उस काम के प्रति हमारा डर और भी भयानक हो जाता है | उस डर पर काबु पाने का सबसे आसान तरीका है कि जिस चीज या परिस्थिति से आप डर रहे है उसके बारे मे सही तथा अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त कर ले | जिस काम से आपको डर लगता है आप उसी काम को ज्यादा से ज्यादा करे तथा उस काम के साथ दोस्ती कर ले | फिर आपको लगेगा कि जिस काम या चीज से आप डर रहे थे वह तो एक दम साधारण है |

आपको जब भी किसी चीज या स्थिति से डर लगे, तो कम से कम एक बार खुद को आजमाकर देखे कि क्या मै इस डर पर जीत हासिल करके यह चीज प्राप्त कर सकता हूँ? इससे आपका कुछ भी नही बिगडेगा और केवल आत्मविश्वास ही बढेगा | अगर आपने इस डर के आगे घुटने टेक दिए, तब यह डर एक असलियत बन जायेगा और आप उस काम या चीज को अपने जीवन मे कभी भी प्राप्त नही कर सकोगे | जीवन मे कभी भी सफल नही हो सकोगे |

अगर जीवन मे हर कदम पर सफल होना है तो डर नाम की चीज को अपने अंदर से बाहर निकाल दो तथा केवल सकारात्मक सोच रखे नकारात्मक कभी ना सोचे |

Note : यदि आपके पास कोई कहानी या article है और उसे हमारे साथ Share करना चाहते है तो उसे हमे Email करे, पसंद आई तो जरूर publish करूंगा |

Work like as Entrepreneur not as Employee



दोस्तों खुद को एक कंपनी मान लीजिये । जैसे आप एक Recruiter हो तो आप की कंपनी का नाम  (your name) Corporation) है जो Main Company (जिसमे अभी आप काम कर रहे हो) को Recruitment services दे रही है । 

आप खुद analyse करो कि Company को आपकी कंपनी कितना कंट्रीब्यूशन कर रही है, आप अपनी Value और कैसे बढ़ा  सकते हो | हम जो काम कर रहे है उससे और कैसे Value add कर सकते है |

क्योकि जैसे जैसे आप अपनी सर्विसेज बढ़ाएंगे आपका -
Contribution (कंट्रीब्यूशन) बढेगा |
Skills improve (स्किल्स इम्प्रूव) होंगे |
Knowledge (नॉलेज) बढ़ेगी |
Competencies बढ़ेगी |
Commitment (कमिटमेंट) add होंगी |
Relations strong (रिलेशन स्ट्रांग) होंगे |

अपने आसपास देखो, जिसने अपनी सर्विसेज (Services) बढ़ायी , उसकी reputation  बढ़ी|  उसकी सैलरी बढ़ी,  उसका प्रमोशन हुआ |

कुछ लोग दुसरो को बढ़ता हुआ देखते है और प्रमोशन होते हुए देखते है, तो कहते है कि ये चमचागिरी करता है या इसकी किस्मत अच्छी है, लेकिन दोस्तों, ये वो लोग होते है, जो खुद तो कुछ करते नहीं और दुसरो को blame करते रहते है |

तो दोस्तों ये आपके हाथ में है कि आप को अपनी कंपनी को डुबोना  है या आगे grow करना है |


SEE YOUR PROBLEM AS A SOLUTION


एक बेरोजगार युवा ने OFFICE-BOY के लिए प्रार्थना पत्र लिखा|
एक अधिकारी ने उसका इन्टरव्युं लिया| इन्टरव्युं के बाद उसने युवा लडके से उसकी E-MAIL ID माँगी|
उस लडके पास E-MAIL ID नही थी|
अधिकारी बोला : ” आज जिसके पास E- MAIL ID नही उसकी कोई पहचान नही|
मुझे अफसोस है लेकिन एक पहचानहीन व्यक्ति के लिए हमारी OFFICE मेँ कोई
जगह नही|”
लडका निराश हुआ, लेकिन हिम्मत नही हारी| थोडा सोचने के बाद
अपनी 500 रुपये जैसी मामुली रकम की साग-सब्जी खरीदी और घर-घर जाकर  बेचने लगा | यह काम पुरे दिन मेँ तीन बार किया.रात को जब घर जाने लगा तब उसके हाथमेँ 3000 रुपये थे |
दुसरे दिन दुगुने उत्साह से काम पर लग गया, थोडे वर्षो मेँ उसके पास एक दर्जन डीलीवरी वाहन थी.
पाँच ही साल मेँ अमेरिका के सबसे बडे रीटेलरो मेँ उसकी गिनती होने लगी |
परिवार के लिए बीमा करने के लिए एक बीमा ऐजेन्ट को बुलाया|
परिवार की जरुरत के हिसाब से विविध बीमा पोलीसी के बारे मेँ बातचीत हुई|
बातचीत के बाद बीमा ऐजेन्ट ने उसकी E-MAIL ID माँगी |

उस लडके ने कहा : ‘ मेरे पास कोई E-MAIL ID नही है |‘ऐजेन्ट ने अचरज करते हुए बोला : ‘ आपके पास E-MAIL ID नही है,
तो इतना बडा व्यवसाय कैसे खडा किया ?
क्या आपने कभी सोचा है कि आज के जमाने की अनिवार्य जरुरतमंद जैसी E-MAIL ID होती तो आप क्या होते ? ”
उस लडके हँसकर जवाब दिया : ” OFFICE-BOY. ”


MORAL :
PROBLEM
हमारी रोजाना जिन्दगी का अनिवार्य हिस्सा है| Main मुद्दा तो यह है कि हर एक PROBLAM को किस तरीके से SOLVE
करते है | निराश होकर PROBLEM को रखने के बजाय PROBLEM को नई नजर से देखेगेँ तो उसमेँ भी कई मौके दिखेगेँ|
छोटी सी PROBLEM सफलता के बीच बाधा डालती हो तो उस PROBLEM को ही नई द्रष्टि से SOLVE करके उसको EXTRA-CHANCE बनाओ ना कि LAST CHANCE.

 

आभासी दुनिया से बाहर निकलना

ईमेल, फेसबुक, ट्विटर, चैट, मोबाइल और शेयरिंग की दुनिया में यह बहुत संभव है कि आप वास्तविक दुनिया से दूर होते जाएँ. ये चीज़ें बुरी नहीं हैं लेकिन ये वास्तविक दुनिया में आमने-सामने घटित होनेवाले संपर्क का स्थान नहीं ले सकतीं. लोगों से मेलमिलाप रखने, उनके सुख-दुःख में शरीक होने से ज्यादा कनेक्टिंग और कुछ नहीं है. आप चाहे जिस विधि से लोगों से जुड़ना चाहें, आपका लक्ष्य होना चाहिए कि आप लम्बे समय के लिए जुड़ें. दोस्तों की संख्या नहीं बल्कि उनके साथ की कीमत होती है.

बोनस टिप:

हम कई अवसरों पर खुद को पीछे कर देते हैं क्योंकि हमें कुछ पता नहीं होता या हम यह नहीं जानते कि शुरुआत कहाँ से करें. ऐसे में “मैं नहीं जानता” कहने के बजाय “मैं यह जानकर रहूँगा” कहने की आदत डालें. यह टिप दिखने में आसान है पर बड़े करिश्मे कर सकती है. इसे अपनाकर आप बिजनेस में आगे रहने के लिए ज़रूरी आक्रामकता दिखा सकते हैं. आप योजनाबद्ध तरीके से अपनी किताबें छपवा सकते हैं. और यदि आप ठान ही लें तो पूरी दुनिया घूमने के लिए भी निकल सकते हैं. संकल्प लें कि आप जानकारी नहीं होने को अपनी प्रगति की राह का रोड़ा नहीं बनने देंगे.

अपने हुनर और काबिलियत को निखारें:

पेन और पेपर लें. पेपर के बीच एक लाइन खींचकर दो कॉलम बनायें. पहले कॉलम में अपने पिछले तीस दिनों के सारे गैरज़रूरी खर्चे लिखें जैसे अनावश्यक कपड़ों, शौपिंग, जंक फ़ूड, सिनेमा, मौज-मजे में खर्च की गयी रकम. हर महीने चुकाए जाने वाले ज़रूरी बिलों की रकम इसमें शामिल न करें. अब दूसरे कॉलम में उन चीज़ों के बारे में लिखें जिन्हें आप पैसे की कमी के कारण कर नहीं पा रहे हैं. शायद आप किसी वर्कशौप या कोचिंग में जाना चाहते हों या आपको एक्सरसाइज बाइक खरीदनी हो. आप पहले कॉलम में किये गए खर्चों में कटौती करके दुसरे कॉलम में शामिल चीज़ों के लिए जगह बना सकते हैं.